एक समय थे भारतीय क्रिकेट के बादशाह, आज हैं दाने-दाने के मोहताज़

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आज जहां क्रिकेट खेल रहे खिलाडियों पर करोड़ो की बरसात हो रही है। वही देश का एक वीर सपूत धुल छान रहा है। जिसे देखके आपको शर्म जरुर आने वाली है। बता दें की इनका नाम है भालजी डामोरन। जो गुजरात के है और नेत्रहीन हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए वर्ल्ड कप भी खेला और उस दौर के हीरो भी कहलाये लेकिन आज गाँव में रहकर ही भैंसे चराकर परिवार का भरण पोषण करते हैं।

गुजरात से आने वाले इस नेत्रहीन क्रिकेटर ने अब तक कुल 125 क्रिकेट मैच खेले हैं। जिसमे से उन्होंने 3 हजार से भी अधिक रन बनाकर रिकोर्ड कायम किया है और इस कारण से उन्हें कई अवार्ड्स से सम्मानित भी किया गया है। जिसके बाद उन्हें उम्मीद थी कि उनकी लाइफ बन जायेगी लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ।

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भालजी को लगता था कि इसके बाद उन्हें विकलांग और स्पोर्ट्स कोटा भी मदद कर देगा। तो उनकी लाइफ बन जाएगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और उम्र के साथ उनका करियर ख़त्म हो गया और उन्हें दुबारा गाँव में उसी जगह पर लौटना पडा जहां से उन्होंने शुरूआत किया था और दुबारा उन्हें कोई झाँकने तक भी नही आया।

अब फिलहाल वो उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें सरकार की तरफ से कोई मदद मिलेगी या फिर इसी कोटे के तहत कोई नौकरी भी मिल जाये जीवन स्तर में कुछ सुधार आएगा। भालजी देश के अनमोल रत्न हैं जो नेत्रहीन होते हुए भी देश के लिए कितना कुछ कर गए। लेकिन सरकार अभी तक भालजी को बदले में कुछ दे नही पाई है ये काफी शर्म का विषय है।

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