जाने मर्दों के मुकाबले हमेशा ठंडी रहती हैं महिलाएं…!

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हाल ही में पुरुषो और महिलाओ पर किये गए शोध में यह खुलासा हुआ है जिसे जानकर आप चौक जायेगे जी हां पुरुषों की तुलना में बॉडी फैट अधिक होने के बाद भी महिलाओं का शरीर ठंडा रहता है। फीमेल बॉडी का कोर टेम्प्रेचर बॉडी फैट के वजह से अधिक होता है, क्योंकि वसा गर्मी बनाए रखने में मददगार है। परन्तु उनकी मेटाबोलिक रेट कम होती है। यही कारण है कि बॉडी फैट अधिक होने के बाद भी उनकी बॉडी अंदर से ठंडी रहती है।

पुरुषों में मांसपेशियां ज्यादा होने से शरीर में गर्मी बहुत जल्द फैलती है। उनका शरीर जल्दी ठंडा हो जाता है। उनका मेटाबोलिक रेट भी अधिक होता है। बता दे कि मेटाबॉलिज्म से ही एनर्जी आती है।

जैसे कि इसी प्रोसेस से खाना डाइजेस्ट होता है। बॉडी में एनर्जी बनती है। बता दे कि जिन महिलाओं का अधिकतर समय बैठे-बैठे निकलता है, उनकी मेटाबोलिक रेट मर्दों से लगभग 35 फीसदी कम होती है। इससे उनके शरीर में बहुत कम गर्मी पैदा होती है। इससे वे भीतर से अधिक ठंडा महसूस करती हैं।

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रक्त का बहाव संकीर्ण –

ठंडे मौसम में एक महिला के हाथ और पैर में रक्त बहाव बहुत ही कम हो जाता है। यदि एक पुरूष और महिला को समान तापमान में रखा जाए,तो औरत के शरीर में रक्त का बहाव संकीर्ण होगा। इससे भी महिलाओं को ठंडक अधिक महसूस होती है।

बढ़ता-घटता फीमेल बॉडी टेम्प्रेचर –

पीरियड और हार्मानल साइकिल भी इसके लिए जिम्मेदार है। उनकी बॉडी में जो एस्ट्रोजन हार्मोन होता है। वह खून को इतना गाढ़ा बना देता है कि खून पतली रक्त-वाहिकाओं में नहीं जा पाता, खासकर हाथ, पांव और कानों में। बता दे कि एक महिला के शरीर का तापमान बढ़ता-घटता रहता है। ये 36.9 डिग्री से 37.4 डिग्री के बीच उतरता-चढ़ता रहता है, जबकि पुरुषों के शरीर का तापमान 37 डिग्री पर ही रहता है।

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