मीठे से नहीं, इन 9 वजहों से होती है डायबिटीज, घरेलू उपचार करेगा बचाव…!

आपने ज्यादातर लोगों को कहते सुना होगा कि अधिक मीठा मत खाओं, डायबिटीज हो जाएगी। मगर क्या ये पूरी प्रकार सच है। डायबिटीज में डॉक्टर मीठे से परहेज करने के लिए अवश्य कहते हैं किन्तु क्या जिन्हें ये मुसीबत नहीं है उन्हें भी मीठा खाने से परहेज करना चाहिए? बता दें कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। मीठा खाने और डायबिटीज में कोई कनेक्शन नहीं है। संसार में काफी से लोग तो ऐसे होते हैं जिन्हें मीठा बिल्कुल पसंद नहीं किन्तु फिर भी वो इसकी चपेट में आ जाते हैं क्योंकि डायबिटीज अन्य वजहों से भी हो सकती है।

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क्या है डायबिटीज

पेंक्रियाज ग्रंथी में इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के वजह खून में ग्लूकोज स्तर समान्य से ज्यादा बढ़ जाता है, जिसे डायबिटीज कहा जाता है। इंसुलिन एक हॉर्मोन है, जो पाचन ग्रन्थि द्वारा बनता है और जो भोजन को एनर्जी में बदलने का काम करता है। इसके बिना शरीर शुगर की मात्रा को कंट्रोल नहीं कर पाता, जिससे आप डायबिटीज की चपेट में आज जाते हैं।

कैसे होती है डायबिटीज

दरअसल, डायबिटीज होने का वजह इंसुलिन की कमी या इंसुलिन रेजिस्टेंस है, मीठा खाना नहीं। मगर इसका ये मतलब नहीं कि डायबिटीज होने के बाद भी शुगर खाना उसी मात्रा में बरकरार रखा जाए। डायबिटीज के मरीज मिठाई डॉक्टर की सुझाव से खा सकते हैं। इसके साथ ही मिठास के लिए शक्कर की जगह एस्पार्टेम का यूज करना इनके लिए लाभदायक है।

कितनी मात्रा में ले सकते हैं शुगर

WHO के मुताबिक यदि आप दिनभर में 6 चम्मच शुगर का सेवन कर रहे हैं तो आपको घबराने की आवशयकता नहीं। क्योंकि शुगर की इतनी मात्रा से शरीर को कोई हानि नहीं होता।

डायबिटीज के कारण

ब्रेकफास्ट छोड़ना भी एक कारण

सुबह नाश्ता स्किप करके आप टाइप-2 डायबिटीज को न्यौता दे रहे हैं। रिसर्च के अनुसार, जो लोग रोज नाश्ता नहीं करते उनमें डायबिटीज का खतरा 33% और हफ्ते में 4 दिन ब्रेकफास्ट ना करने वाले में इसका खतरा 55% ज्यादा होता है। दरअसल, सुबह का नाश्ता ना करने से शरीर के अंदर इंसुलिन का रेसिस्टेंस बढ़ जाता है, जिससे मेटाबोलिज्म सिस्टम पर दबाव पड़ने लगता है और इससे शरीर के अंदर डायबिटीज के लक्षण पनपने लगते हैं।

विटामिन डी की कमी

स्टडी के मुताबिक, विटामिन डी की कमी से शरीर में ब्लड ग्लूकोस का स्तर बढ़ जाता है, जिसे प्री-डायबिटिक माना जाता है। ये एक ऐसी स्थिति है, जिसमें किसी व्यक्ति का हाई ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता किन्तु वह इतना अधिक नहीं होता कि उसे डायबिटिक कहा जाएं। मगर धीरे-धीरे ये स्थिति आपको डायबिटीज का शिकार बना देती है।

वजन बढ़ने से भी हो सकती है डायबिटीज

बढ़ा हुआ वजन आज के वक़्त में प्रत्येक तीसरे व्यक्ति की परेशानी है किन्तु आपको बता दें कि मोटापा बहुत गंभीर रोगों का घर भी है, जिसमें से एक है डायबिटीज। शोध के मुताबिक, पतले लोगों के टक्कर मोटे लोगों में इसका खतरा 3 गुणा अधिक होता है। इतना ही नहीं, मोटापा हाई ब्लड प्रेशल, हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों का कारण भी बनता है।

जेनेटिक भी है कारण

जी हां, डायबिटीज एक अनुवांशिक रोग है। यदि किसी के माता पिता को डायबिटीज है तो उनके बच्चों को भी मधुमेह होने की सम्भावना अधिक होती है। इसके अतिरिक्त मानसिक गर्भावस्था में अधिक दवाइयों लेने, चाय, दूध, कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन और धूम्रपान या तंबाकू से भी इस रोग का खतरा बढ़ जाता है।

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दिनभर ऑफिस में बैठे रहना

जो लोग दिनभर ऑफिस में कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं और बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करते उन लोगों में डायबिटीज होने के खतरा 80% बढ़ जाता है।

इंसुलिन का ना बनना

इंसुलिन द्वारा पहुंचाई गई शुगर से ही कोशिकाओं या सेल्स को एनर्जी मिलती है। मगर इंसुलिन के कम निर्माण से खून में शुगर ज्यादा हो जाती है और सेल्स की एनर्जी कम होने लगती है। शारीरिक ऊर्जा कम होने से रक्त में शुगर जमा होती चली जाती है, जोकि यूरिन का रास्ते बाहर निकलती है। यही वजह है कि डायबिटीज रोगी को बार-बार पेशाब आता है।

ज्यादा तनाव लेना

डॉक्टर्स का मानना है कि अधिक तनाव में रहने पर शरीर का शुगर लेवल बढ़ जाता है। यदि आप निरंतर तनाव या अवसाद जैसी स्थिति से घिरे रहते हैं तो आप शुगर की चपेट में आ सकते हैं।

भरपूर नींद ना लेना

कम सोने वाले लोगों में भी शुगर होने के चांस बढ़ जाते हैं। कभी-कभी कम सोना तो नार्मल बात है किन्तु यदि आप निरंतर अपनी नींद पूरी नहीं कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। ऐसे लोगों को शुगर की रोग जल्दी अपना शिकार बनाती है।

अमरूद करेगा डायबिटीज का उपचार

एक अध्ययन के अनुसार, अमरूद ब्लड शुगर के स्तर को कम करके डायबिटीज का उपचार करने में मददगार होता है। दरअसल, अमरूद अल्फा-ग्लूकोसिडेस नामक एंजाइम के कार्य को कम करता है, जो ब्लड में ग्लूकोज को भोजन में परिवर्तित करता है। इससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है।

ऐसे बनाएं अमरूद के पत्तों की चाय

अमरूद के 5-6 पत्ते को अच्छी प्रकार धोकर साफ कर लें। इसके बाद लगभग 1 लीटर पानी में इन पत्तों को डालकर 10 मिनट तक उबालें और फिर पानी छानकर एक गिलास में डालें। आप स्वीटनर के रूप इसमें हल्का-सा शहद मिला सकते हैं। आपकी चाय तैयार है।
कब और कैसे पीएं?

शुगर कंट्रोल करने के लिए इसकी 1 कप चाय का सेवन सुबह पीएं। इसके अतिरिक्त आप से भोजन के बाद भी पी सकते हैं किन्तु दिनभर में इसकी 1-2 कप चाय ही लें।

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