इंजीनियर पति, MBA पत्नी, किन्तु चुटिया रखने की कारण से आई तलाक की स्थिति…!

अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर टिके रहना कभी-कभी बहुत ही महंगा सिद्ध हो सकता है। मध्य प्रदेश के भोपाल में ऐसा ही विषय सामने आया है। यहां पर पत्नी अपने पति के चुटिया रखने से बहुत ही नाराज थी। किन्तु जब उसने अपने पति से चुटिया हटाने के लिए कहा तो पति ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। मामला इतना आगे बढ़ गया कि यह फैमिली कोर्ट तक पहुंच गया। किन्तु स्थिति यहां तक पहुंचने के बाद भी पति ने अपनी चुटिया हटाने से साफ मना कर दिया है, जिसकी वजह से पति-पत्नी के बीच तलाक की नौबत आ गई है।

Loading...

जानकारी के मुताबिक पति पेशे से एक्जीक्युटिव इंजीनियर है और पत्नी एमबीए। पत्नी का कहना है कि उसके पति की चुटिया के कारण से उसके घर वाले उसका मजाक उड़ाते हैं और उसे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। किन्तु वहीं दूसरी ओर पति का कहना है कि वह ब्राह्मण है और उसका जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ है, लिहाजा उसकी चुटिया मरते दम तक उसके साथ रहेगी। पति-पत्नी के बीच ज्यादातर इस बात को लेकर विवाद होता था। जिसके बाद आखिरकार पत्नी ने चुटिया के कारण से पति को तलाक देने का निर्णय ले लिया।

Loading...

ये विषय जब फैमिली कोर्ट पहुंचा तो काउंससल ने कहा कि ये विवाद तीन वर्ष पुराना है। विवाह के बाद दोनों के बीच सबकुछ अच्छा चल रहा था। किन्तु सास-ससुर की एक सड़क हादसे में मौत हो गई। जिसके चलते पति को मुंडन कराना पड़ा और उसने सिर पर चुटिया रख ली। किन्तु जब कुछ वक़्त बीत गया तो पत्नी अपने पति से चुटिया को काटने की मांग करने लगी। किन्तु पति ज्यादातर कुछ ना कुछ कहकर इस बात को टाल देता था। काउंसलर ने बताया कि पत्नी इस बात से आहत थी कि पति के चुटिया रखने की कारण से लोग उसे पंडित जी कहने लगे थे जोकि पत्नी को बहुत बुरा लगता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया।

वहीं पति का कहना था कि वह पत्नी को सभी प्रकार के सुख देता है और बावजूद इसके वह उसकी चोटी के पीछे पड़ी है। पति की चुटिया से नाराज होकर पत्नी पिछले छह महीने से अपने मायके में रह रही थी। पत्नी का साफ कहना था कि या तो अपनी चुटिया हटा लो या तो उसे तलाक दे दो। वहीं पति का कहना है कि उसने अपने-माता पिता की मौत के बाद ये सपथ लिया है कि वह सिर पर चुटिया हमेशा रखेगा, ये उसकी धार्मिक मान्यता है। वह अपने मां-बाप का अकेला बेटा है और उसे ही अपनी मान्यताओं का निर्वहन करना पड़ेगा।

loading...
Loading...